सभी मुहूर्त
व्यतीपात सत्ताईस नित्य योगों में सत्रहवाँ है — सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त भोगांश से बनने वाला दैनिक योग, इसलिए यह पूरा दिन नहीं, एक अवधि है। वैधृति के साथ यह उन दो योगों में है जिन्हें कार्य के लिए सबसे अधिक वर्ज्य माना गया है, और इसके चलते नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता। यह सब के लिए अशुभ नहीं है: वही समय जप, तर्पण और श्राद्ध के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।
विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल
- जनवरी
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4जन॰10:06 → 5 जन॰ 07:30शनिवार
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29जन॰21:20 → 30 जन॰ 18:32बुधवार
- फ़रवरी
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24फ़र॰10:04 → 25 फ़र॰ 08:13सोमवार
- मार्च
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21मार्च18:40 → 22 मार्च 18:35शुक्रवार
- अप्रैल
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15अप्रैल23:31 → 17 अप्रैल 00:17मंगलवार
- मई
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11मई03:59 → 12 मई 04:59रविवार
- जून
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5जून09:12 → 6 जून 10:11गुरुवार
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30जून17:19 → 1 जुल॰ 17:17सोमवार
- जुलाई
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26जुल॰05:30 → 27 जुल॰ 04:04शनिवार
- अगस्त
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20अग॰18:12 → 21 अग॰ 16:12बुधवार
- सितंबर
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15सित॰04:54 → 16 सित॰ 02:33सोमवार
- अक्टूबर
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10अक्टू॰17:40 → 11 अक्टू॰ 14:05शुक्रवार
- नवंबर
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5नव॰11:27 → 6 नव॰ 07:03बुधवार
- दिसंबर
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1दिस॰04:21 → 2 दिस॰ 00:57सोमवार
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26दिस॰13:59 → 27 दिस॰ 12:20शुक्रवार
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।