सीखें · पञ्चाङ्ग और मुहूर्त
नक्षत्र क्या है?
नक्षत्र 27 चान्द्र भवनों में से एक है — 360° के राशिचक्र के 13°20′ के बराबर खंड। किसी क्षण का नक्षत्र बस वही है जिससे चन्द्रमा उस समय गुज़र रहा हो।
27 भवन, हर एक के 4 पद
राशिचक्र अश्विनी से रेवती तक 27 नक्षत्रों में बँटा है; हर नक्षत्र आगे 3°20′ के चार पदों (चरणों) में बँटता है। चन्द्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है।
यह कैसे निकलता है
चन्द्रमा के निरयण भोगांश को 13°20′ से भाग दें; पूर्णांक नक्षत्र बताता है और शेष पद। पञ्चाङ्ग के हर अंग की तरह यह सूर्योदय पर पढ़ा जाता है, और इसकी समाप्ति तब है जब चन्द्रमा उस खंड से बाहर निकले।
कहाँ काम आता है
जन्म नक्षत्र पारंपरिक नाम का पहला अक्षर और विंशोत्तरी दशा का क्रम तय करता है। कुछ नक्षत्र (गंड मूल समूह) और वार के साथ उनके योग रवि/गुरु पुष्य जैसे विशेष मुहूर्त बनाते हैं।
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प्रश्न
नक्षत्र कितने होते हैं?
27 चान्द्र भवन, हर एक राशिचक्र के 13°20′ का और चार पदों में बँटा हुआ।
पद क्या है?
नक्षत्र का चौथाई भाग (3°20′)। चन्द्रमा का पद उसकी स्थिति को और सूक्ष्म करता है और नामकरण व कुंडली की गणना में काम आता है।