सीखें · पञ्चाङ्ग और मुहूर्त

पञ्चाङ्ग क्या है?

पञ्चाङ्ग (संस्कृत पञ्च-अङ्ग, “पाँच अंग”) शास्त्रीय हिन्दू पंचांग है। यह किसी भी दिन को सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति से निकले पाँच काल-अंगों से बताता है, और त्योहार, व्रत और शुभ समय (मुहूर्त) तय करने का आधार यही है।

पृथ्वीसूर्यचन्द्र132°तिथिसूर्य–चन्द्र का कोण, 12° की एककरणआधी तिथि, 6°योगसूर्य और चन्द्र का जोड़, 13°20′ का एकनक्षत्रचन्द्रमा जहाँ है, 13°20′ का एकवारसूर्योदय से सूर्योदय, सप्ताह का दिनतीन कोण · एक स्थान · एक दिन
तीन अंग सूर्य और चन्द्रमा के बीच के कोण हैं, एक तारों के बीच चन्द्रमा की जगह है, और एक स्वयं दिन।
अंग5 — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार
गणना का आधारसूर्य और चन्द्रमा के भोगांश
दिन शुरू होता हैस्थानीय सूर्योदय से
बदलता हैस्थान के साथ — सूर्योदय खिसकता है

पाँच अंग

पञ्चाङ्ग हर दिन के पाँच अंग बताता है: तिथि (चान्द्र दिन), नक्षत्र (जिस तारा-समूह में चन्द्रमा है), योग (सूर्य और चन्द्रमा के कोणों का जोड़), करण (आधी तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर दिन की खगोलीय पहचान हैं।

गणना कैसे होती है

हर अंग सूर्य और चन्द्रमा के वास्तविक (दृक्) भोगांश का फल है। चन्द्रमा जब-जब सूर्य से 12° आगे बढ़ता है, एक तिथि पूरी होती है; चन्द्रमा की हर 13°20′ की चाल पर एक नक्षत्र। अंग सूर्योदय से पढ़े जाते हैं, इसलिए किस समय कौन-सी तिथि और नक्षत्र चल रहा है — और वे कब बदलते हैं — यह आपकी तारीख और स्थान दोनों पर निर्भर है।

यह क्यों ज़रूरी है

त्योहार और व्रत तिथि और नक्षत्र के नियमों से तय होते हैं, ग्रेगोरियन तारीख से नहीं; इसलिए “चैत्र शुक्ल प्रतिपदा” जैसे नियम को असली तारीख में बदलने का काम पञ्चाङ्ग ही करता है। मुहूर्त — किसी काम के लिए शुभ अवधि चुनना — भी इसी पर टिका है।

संबंधित

प्रश्न

पञ्चाङ्ग के पाँच अंग कौन-से हैं?

तिथि (चान्द्र दिन), नक्षत्र, योग, करण और वार (सप्ताह का दिन)।

क्या पञ्चाङ्ग स्थान के साथ बदलता है?

हाँ। अंग स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं, इसलिए चल रही तिथि/नक्षत्र और उनके बदलने का समय देशान्तर और अक्षांश के साथ खिसकता है।