सभी मुहूर्त
वैधृति नित्य योगों में सत्ताईसवाँ और अंतिम है, और व्यतीपात का सहचर: दोनों का नाम साथ लिया जाता है और दोनों में नया कार्य वर्ज्य माना जाता है, जबकि वही समय जप और पितृकर्म के लिए उपयुक्त कहा गया है। यह तिथि नहीं, योग है — इसलिए दिनभर नहीं, दिन के भीतर की एक अवधि है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।
विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल
- जनवरी
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13जन॰06:43 → 14 जन॰ 04:37सोमवार
- फ़रवरी
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7फ़र॰16:15 → 8 फ़र॰ 14:03शुक्रवार
- मार्च
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5मार्च02:05 → 23:06बुधवार
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30मार्च17:52 → 31 मार्च 13:44रविवार
- अप्रैल
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25अप्रैल12:29 → 26 अप्रैल 08:40शुक्रवार
- मई
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21मई02:49 → 22 मई 00:33बुधवार
- जून
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15जून12:18 → 16 जून 11:05रविवार
- जुलाई
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10जुल॰21:36 → 11 जुल॰ 20:43गुरुवार
- अगस्त
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5अग॰07:23 → 6 अग॰ 07:16मंगलवार
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30अग॰15:08 → 31 अग॰ 15:57शनिवार
- सितंबर
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24सित॰21:01 → 25 सित॰ 21:52बुधवार
- अक्टूबर
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20अक्टू॰02:03 → 21 अक्टू॰ 02:33सोमवार
- नवंबर
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14नव॰06:26 → 15 नव॰ 06:24शुक्रवार
- दिसंबर
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9दिस॰14:32 → 10 दिस॰ 12:45मंगलवार
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।