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वैधृति 2027

वैधृति नित्य योगों में सत्ताईसवाँ और अंतिम है, और व्यतीपात का सहचर: दोनों का नाम साथ लिया जाता है और दोनों में नया कार्य वर्ज्य माना जाता है, जबकि वही समय जप और पितृकर्म के लिए उपयुक्त कहा गया है। यह तिथि नहीं, योग है — इसलिए दिनभर नहीं, दिन के भीतर की एक अवधि है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • जनवरी
  • 20जन॰
    22:22 → 21 जन॰ 18:07
    बुधवार
  • फ़रवरी
  • 15फ़र॰
    12:31 → 16 फ़र॰ 09:32
    सोमवार
  • मार्च
  • 12मार्च
    21:33 → 13 मार्च 19:29
    शुक्रवार
  • अप्रैल
  • 7अप्रैल
    07:25 → 8 अप्रैल 05:35
    बुधवार
  • मई
  • 2मई
    18:28 → 3 मई 17:38
    रविवार
  • 28मई
    02:56 → 29 मई 03:33
    शुक्रवार
  • जून
  • 22जून
    08:54 → 23 जून 10:01
    मंगलवार
  • जुलाई
  • 17जुल॰
    14:22 → 18 जुल॰ 15:20
    शनिवार
  • अगस्त
  • 11अग॰
    20:04 → 12 अग॰ 20:37
    बुधवार
  • सितंबर
  • 6सित॰
    04:36 → 7 सित॰ 03:47
    सोमवार
  • अक्टूबर
  • 1अक्टू॰
    18:10 → 2 अक्टू॰ 15:40
    शुक्रवार
  • 27अक्टू॰
    08:41 → 28 अक्टू॰ 05:44
    बुधवार
  • नवंबर
  • 21नव॰
    19:24 → 22 नव॰ 16:42
    रविवार
  • दिसंबर
  • 17दिस॰
    06:09 → 18 दिस॰ 02:46
    शुक्रवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।