सभी मुहूर्त
वैधृति नित्य योगों में सत्ताईसवाँ और अंतिम है, और व्यतीपात का सहचर: दोनों का नाम साथ लिया जाता है और दोनों में नया कार्य वर्ज्य माना जाता है, जबकि वही समय जप और पितृकर्म के लिए उपयुक्त कहा गया है। यह तिथि नहीं, योग है — इसलिए दिनभर नहीं, दिन के भीतर की एक अवधि है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।
विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल
- जनवरी
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11जन॰21:52 → 12 जन॰ 17:54मंगलवार
- फ़रवरी
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6फ़र॰13:19 → 7 फ़र॰ 10:32रविवार
- मार्च
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2मार्च22:20 → 3 मार्च 21:22गुरुवार
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28मार्च03:51 → 29 मार्च 03:38मंगलवार
- अप्रैल
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22अप्रैल10:05 → 23 अप्रैल 10:22शनिवार
- मई
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17मई16:35 → 18 मई 17:31बुधवार
- जून
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11जून23:44 → 13 जून 00:29रविवार
- जुलाई
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7जुल॰08:14 → 8 जुल॰ 08:17शुक्रवार
- अगस्त
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1अग॰16:27 → 2 अग॰ 16:01मंगलवार
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27अग॰01:17 → 23:48रविवार
- सितंबर
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21सित॰15:16 → 22 सित॰ 11:57गुरुवार
- अक्टूबर
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17अक्टू॰09:37 → 18 अक्टू॰ 05:26मंगलवार
- नवंबर
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12नव॰01:06 → 21:43रविवार
- दिसंबर
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7दिस॰10:57 → 8 दिस॰ 08:22गुरुवार
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।