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वैधृति 2026

वैधृति नित्य योगों में सत्ताईसवाँ और अंतिम है, और व्यतीपात का सहचर: दोनों का नाम साथ लिया जाता है और दोनों में नया कार्य वर्ज्य माना जाता है, जबकि वही समय जप और पितृकर्म के लिए उपयुक्त कहा गया है। यह तिथि नहीं, योग है — इसलिए दिनभर नहीं, दिन के भीतर की एक अवधि है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • जनवरी
  • 4जन॰
    05:14 → 5 जन॰ 01:46
    रविवार
  • 29जन॰
    20:26 → 30 जन॰ 16:57
    गुरुवार
  • फ़रवरी
  • 24फ़र॰
    07:22 → 25 फ़र॰ 04:25
    मंगलवार
  • मार्च
  • 21मार्च
    19:00 → 22 मार्च 15:40
    शनिवार
  • अप्रैल
  • 16अप्रैल
    10:36 → 17 अप्रैल 07:20
    गुरुवार
  • मई
  • 12मई
    01:03 → 23:18
    मंगलवार
  • जून
  • 6जून
    10:03 → 7 जून 10:00
    शनिवार
  • जुलाई
  • 1जुल॰
    16:03 → 2 जुल॰ 16:38
    बुधवार
  • 26जुल॰
    22:04 → 27 जुल॰ 22:53
    रविवार
  • अगस्त
  • 21अग॰
    04:24 → 22 अग॰ 05:17
    शुक्रवार
  • सितंबर
  • 15सित॰
    12:19 → 16 सित॰ 12:21
    मंगलवार
  • अक्टूबर
  • 10अक्टू॰
    22:01 → 11 अक्टू॰ 21:04
    शनिवार
  • नवंबर
  • 5नव॰
    06:25 → 6 नव॰ 05:08
    गुरुवार
  • 30नव॰
    14:26 → 1 दिस॰ 12:14
    सोमवार
  • दिसंबर
  • 26दिस॰
    04:15 → 27 दिस॰ 00:21
    शनिवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।