सभी मुहूर्त
वैधृति नित्य योगों में सत्ताईसवाँ और अंतिम है, और व्यतीपात का सहचर: दोनों का नाम साथ लिया जाता है और दोनों में नया कार्य वर्ज्य माना जाता है, जबकि वही समय जप और पितृकर्म के लिए उपयुक्त कहा गया है। यह तिथि नहीं, योग है — इसलिए दिनभर नहीं, दिन के भीतर की एक अवधि है। यह लगभग हर चांद्र मास में एक बार आता है।
विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल
- जनवरी
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4जन॰05:14 → 5 जन॰ 01:46रविवार
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29जन॰20:26 → 30 जन॰ 16:57गुरुवार
- फ़रवरी
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24फ़र॰07:22 → 25 फ़र॰ 04:25मंगलवार
- मार्च
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21मार्च19:00 → 22 मार्च 15:40शनिवार
- अप्रैल
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16अप्रैल10:36 → 17 अप्रैल 07:20गुरुवार
- मई
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12मई01:03 → 23:18मंगलवार
- जून
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6जून10:03 → 7 जून 10:00शनिवार
- जुलाई
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1जुल॰16:03 → 2 जुल॰ 16:38बुधवार
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26जुल॰22:04 → 27 जुल॰ 22:53रविवार
- अगस्त
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21अग॰04:24 → 22 अग॰ 05:17शुक्रवार
- सितंबर
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15सित॰12:19 → 16 सित॰ 12:21मंगलवार
- अक्टूबर
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10अक्टू॰22:01 → 11 अक्टू॰ 21:04शनिवार
- नवंबर
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5नव॰06:25 → 6 नव॰ 05:08गुरुवार
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30नव॰14:26 → 1 दिस॰ 12:14सोमवार
- दिसंबर
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26दिस॰04:15 → 27 दिस॰ 00:21शनिवार
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।