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पंचक 2030

पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा कुम्भ या मीन में हो — अर्थात धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक, क्योंकि धनिष्ठा का मध्यबिंदु ही कुम्भ का आरंभ है। यह लगभग हर 27 दिन में लौटता है और करीब पाँच दिन रहता है — नाम इसी से पड़ा। इसमें सामान्य शुभ कार्य नहीं, पाँच विशेष कर्म वर्जित माने गए हैं: छत डालना, ईंधन एकत्र करना, पलंग बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा और विधि-रहित दाह-संस्कार।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • 7जन॰
    7 जन॰ → 12 जन॰
    सोमवार
  • 3फ़र॰
    3 फ़र॰ → 8 फ़र॰
    रविवार
  • 3मार्च
    3 मार्च → 7 मार्च
    रविवार
  • 30मार्च
    30 मार्च → 4 अप्रैल
    शनिवार
  • 26अप्रैल
    26 अप्रैल → 1 मई
    शुक्रवार
  • 23मई
    23 मई → 28 मई
    गुरुवार
  • 20जून
    20 जून → 24 जून
    गुरुवार
  • 17जुल॰
    17 जुल॰ → 22 जुल॰
    बुधवार
  • 13अग॰
    13 अग॰ → 18 अग॰
    मंगलवार
  • 10सित॰
    10 सित॰ → 14 सित॰
    मंगलवार
  • 7अक्टू॰
    7 अक्टू॰ → 12 अक्टू॰
    सोमवार
  • 3नव॰
    3 नव॰ → 8 नव॰
    रविवार
  • 1दिस॰
    1 दिस॰ → 5 दिस॰
    रविवार
  • 28दिस॰
    28 दिस॰ → 1 जन॰
    शनिवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।