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पंचक 2033

पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा कुम्भ या मीन में हो — अर्थात धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक, क्योंकि धनिष्ठा का मध्यबिंदु ही कुम्भ का आरंभ है। यह लगभग हर 27 दिन में लौटता है और करीब पाँच दिन रहता है — नाम इसी से पड़ा। इसमें सामान्य शुभ कार्य नहीं, पाँच विशेष कर्म वर्जित माने गए हैं: छत डालना, ईंधन एकत्र करना, पलंग बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा और विधि-रहित दाह-संस्कार।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • 4जन॰
    4 जन॰ → 8 जन॰
    मंगलवार
  • 1फ़र॰
    1 फ़र॰ → 5 फ़र॰
    मंगलवार
  • 28फ़र॰
    28 फ़र॰ → 4 मार्च
    सोमवार
  • 27मार्च
    27 मार्च → 31 मार्च
    रविवार
  • 24अप्रैल
    24 अप्रैल → 28 अप्रैल
    रविवार
  • 21मई
    21 मई → 25 मई
    शनिवार
  • 17जून
    17 जून → 21 जून
    शुक्रवार
  • 15जुल॰
    15 जुल॰ → 19 जुल॰
    शुक्रवार
  • 11अग॰
    11 अग॰ → 15 अग॰
    गुरुवार
  • 7सित॰
    7 सित॰ → 11 सित॰
    बुधवार
  • 5अक्टू॰
    5 अक्टू॰ → 9 अक्टू॰
    बुधवार
  • 1नव॰
    1 नव॰ → 5 नव॰
    मंगलवार
  • 28नव॰
    28 नव॰ → 3 दिस॰
    सोमवार
  • 26दिस॰
    26 दिस॰ → 30 दिस॰
    सोमवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।