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त्रिपुष्कर योग 2030

त्रिपुष्कर योग में भद्रा तिथि (द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी) और वार (रवि, मंगल, शनि) द्विपुष्कर जैसे ही हैं, पर नक्षत्र भिन्न हैं — कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तर फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढा और पूर्वभाद्रपदा, जो त्रिपद नक्षत्र हैं। द्विपुष्कर जहाँ दुगुना करता है, यह तिगुना कहा गया है: लाभ भी तीन बार और हानि भी। दोनों में यह अधिक दुर्लभ है।

शुभ अवधि

  • 5जन॰
    07:10 → 19:08
    शनिवार
  • 20फ़र॰
    00:17 → 06:57
    बुधवार
  • 23फ़र॰
    22:33 → 24 फ़र॰ 16:18
    शनिवार
  • 5मार्च
    12:35 → 14:13
    मंगलवार
  • 10मार्च
    22:27 → 11 मार्च 02:45
    रविवार
  • 24अप्रैल
    00:03 → 06:00
    बुधवार
  • 28अप्रैल
    12:26 → 29 अप्रैल 03:04
    रविवार
  • 4मई
    05:53 → 16:29
    शनिवार
  • 22जून
    05:43 → 10:27
    शनिवार
  • 2जुल॰
    05:46 → 15:24
    मंगलवार
  • 7जुल॰
    06:24 → 19:21
    रविवार
  • 20अग॰
    16:21 → 17:31
    मंगलवार
  • 25अग॰
    03:56 → 26 अग॰ 04:16
    रविवार
  • 3सित॰
    18:32 → 4 सित॰ 02:15
    मंगलवार
  • 8सित॰
    08:19 → 19:57
    रविवार
  • 19अक्टू॰
    06:26 → 07:18
    शनिवार
  • 27अक्टू॰
    22:36 → 28 अक्टू॰ 06:30
    रविवार
  • 6नव॰
    03:42 → 06:35
    बुधवार
  • 21दिस॰
    17:15 → 22 दिस॰ 09:40
    शनिवार
  • 30दिस॰
    07:07 → 07:08
    सोमवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।