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त्रिपुष्कर योग 2032

त्रिपुष्कर योग में भद्रा तिथि (द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी) और वार (रवि, मंगल, शनि) द्विपुष्कर जैसे ही हैं, पर नक्षत्र भिन्न हैं — कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तर फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढा और पूर्वभाद्रपदा, जो त्रिपद नक्षत्र हैं। द्विपुष्कर जहाँ दुगुना करता है, यह तिगुना कहा गया है: लाभ भी तीन बार और हानि भी। दोनों में यह अधिक दुर्लभ है।

शुभ अवधि

  • 4जन॰
    13:22 → 5 जन॰ 06:40
    रविवार
  • 17फ़र॰
    17:45 → 20:38
    मंगलवार
  • 22फ़र॰
    03:24 → 23 फ़र॰ 05:19
    रविवार
  • 28फ़र॰
    06:51 → 17:02
    शनिवार
  • 17अप्रैल
    06:05 → 07:47
    शनिवार
  • 27अप्रैल
    05:57 → 11:55
    मंगलवार
  • 1मई
    12:49 → 2 मई 07:10
    शनिवार
  • 20जून
    05:56 → 23:14
    रविवार
  • 29जून
    05:45 → 12:25
    मंगलवार
  • 3जुल॰
    16:52 → 4 जुल॰ 11:58
    शनिवार
  • 22अग॰
    07:57 → 23:37
    रविवार
  • 31अग॰
    17:02 → 1 सित॰ 06:10
    मंगलवार
  • 6सित॰
    04:50 → 06:11
    सोमवार
  • 16अक्टू॰
    06:25 → 09:47
    शनिवार
  • 24अक्टू॰
    19:00 → 25 अक्टू॰ 06:29
    रविवार
  • 30अक्टू॰
    08:17 → 31 अक्टू॰ 06:44
    शनिवार
  • 9नव॰
    07:48 → 16:34
    मंगलवार
  • 18दिस॰
    13:10 → 19 दिस॰ 02:44
    शनिवार
  • 28दिस॰
    20:00 → 29 दिस॰ 07:08
    मंगलवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।