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ज्येष्ठा
ज्येष्ठा 27 नक्षत्रों में क्रमांक 18 है, जिसका विस्तार निरयण राशिचक्र में 226°40′ – 240°00′ है। इसका विंशोत्तरी स्वामी बुध है, इसलिए इस नक्षत्र में जन्म बुध महादशा से आरम्भ होता है।
| स्वामी | बुध |
|---|---|
| दशा अवधि | 17 वर्ष |
| देवता | इन्द्र |
| प्रतीक | कुण्डल |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | अन्त्य (कफ) |
| योनि | मृग |
| विस्तार | 226°40′ – 240°00′ |
| राशि | वृश्चिक |
गण, नाड़ी और योनि अष्टकूट मिलान के आठ कूटों में से तीन हैं, और ये पूरी कुण्डली से नहीं, केवल चन्द्रमा के नक्षत्र से पढ़े जाते हैं। नीचे दिए चारों पादों में से प्रत्येक का एक अक्षर है — वही नाम अक्षर, जिससे परंपरागत नाम आरम्भ होता है।
नाम अक्षर
-
नो
पाद 1
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या
पाद 2
-
यी
पाद 3
-
यू
पाद 4