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रोहिणी
रोहिणी 27 नक्षत्रों में क्रमांक 4 है, जिसका विस्तार निरयण राशिचक्र में 40°00′ – 53°20′ है। इसका विंशोत्तरी स्वामी चंद्र है, इसलिए इस नक्षत्र में जन्म चंद्र महादशा से आरम्भ होता है।
| स्वामी | चंद्र |
|---|---|
| दशा अवधि | 10 वर्ष |
| देवता | प्रजापति |
| प्रतीक | शकट (बैलगाड़ी) |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | अन्त्य (कफ) |
| योनि | सर्प |
| विस्तार | 40°00′ – 53°20′ |
| राशि | वृषभ |
गण, नाड़ी और योनि अष्टकूट मिलान के आठ कूटों में से तीन हैं, और ये पूरी कुण्डली से नहीं, केवल चन्द्रमा के नक्षत्र से पढ़े जाते हैं। नीचे दिए चारों पादों में से प्रत्येक का एक अक्षर है — वही नाम अक्षर, जिससे परंपरागत नाम आरम्भ होता है।
नाम अक्षर
-
ओ
पाद 1
-
वा
पाद 2
-
वी
पाद 3
-
वु
पाद 4