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कृत्तिका
कृत्तिका 27 नक्षत्रों में क्रमांक 3 है, जिसका विस्तार निरयण राशिचक्र में 26°40′ – 40°00′ है। इसका विंशोत्तरी स्वामी सूर्य है, इसलिए इस नक्षत्र में जन्म सूर्य महादशा से आरम्भ होता है।
| स्वामी | सूर्य |
|---|---|
| दशा अवधि | 6 वर्ष |
| देवता | अग्नि |
| प्रतीक | उस्तरा या अग्निशिखा |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | अन्त्य (कफ) |
| योनि | Mesha |
| विस्तार | 26°40′ – 40°00′ |
| राशि | मेष |
| राशि | वृषभ |
गण, नाड़ी और योनि अष्टकूट मिलान के आठ कूटों में से तीन हैं, और ये पूरी कुण्डली से नहीं, केवल चन्द्रमा के नक्षत्र से पढ़े जाते हैं। नीचे दिए चारों पादों में से प्रत्येक का एक अक्षर है — वही नाम अक्षर, जिससे परंपरागत नाम आरम्भ होता है।
नाम अक्षर
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अ
पाद 1
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ई
पाद 2
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उ
पाद 3
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ए
पाद 4