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मृगशीर्षा
मृगशीर्षा 27 नक्षत्रों में क्रमांक 5 है, जिसका विस्तार निरयण राशिचक्र में 53°20′ – 66°40′ है। इसका विंशोत्तरी स्वामी मंगल है, इसलिए इस नक्षत्र में जन्म मंगल महादशा से आरम्भ होता है।
| स्वामी | मंगल |
|---|---|
| दशा अवधि | 7 वर्ष |
| देवता | सोम |
| प्रतीक | मृग-मस्तक |
| गण | देव |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| योनि | सर्प |
| विस्तार | 53°20′ – 66°40′ |
| राशि | वृषभ |
| राशि | मिथुन |
गण, नाड़ी और योनि अष्टकूट मिलान के आठ कूटों में से तीन हैं, और ये पूरी कुण्डली से नहीं, केवल चन्द्रमा के नक्षत्र से पढ़े जाते हैं। नीचे दिए चारों पादों में से प्रत्येक का एक अक्षर है — वही नाम अक्षर, जिससे परंपरागत नाम आरम्भ होता है।
नाम अक्षर
-
वे
पाद 1
-
वो
पाद 2
-
का
पाद 3
-
की
पाद 4