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पंचक 2025

पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा कुम्भ या मीन में हो — अर्थात धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक, क्योंकि धनिष्ठा का मध्यबिंदु ही कुम्भ का आरंभ है। यह लगभग हर 27 दिन में लौटता है और करीब पाँच दिन रहता है — नाम इसी से पड़ा। इसमें सामान्य शुभ कार्य नहीं, पाँच विशेष कर्म वर्जित माने गए हैं: छत डालना, ईंधन एकत्र करना, पलंग बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा और विधि-रहित दाह-संस्कार।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • 3जन॰
    3 जन॰ → 7 जन॰
    शुक्रवार
  • 30जन॰
    30 जन॰ → 3 फ़र॰
    गुरुवार
  • 27फ़र॰
    27 फ़र॰ → 3 मार्च
    गुरुवार
  • 26मार्च
    26 मार्च → 30 मार्च
    बुधवार
  • 23अप्रैल
    23 अप्रैल → 27 अप्रैल
    बुधवार
  • 20मई
    20 मई → 24 मई
    मंगलवार
  • 16जून
    16 जून → 20 जून
    सोमवार
  • 13जुल॰
    13 जुल॰ → 18 जुल॰
    रविवार
  • 10अग॰
    10 अग॰ → 14 अग॰
    रविवार
  • 6सित॰
    6 सित॰ → 10 सित॰
    शनिवार
  • 3अक्टू॰
    3 अक्टू॰ → 8 अक्टू॰
    शुक्रवार
  • 31अक्टू॰
    31 अक्टू॰ → 4 नव॰
    शुक्रवार
  • 27नव॰
    27 नव॰ → 1 दिस॰
    गुरुवार
  • 24दिस॰
    24 दिस॰ → 29 दिस॰
    बुधवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।