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पंचक 2026

पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा कुम्भ या मीन में हो — अर्थात धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक, क्योंकि धनिष्ठा का मध्यबिंदु ही कुम्भ का आरंभ है। यह लगभग हर 27 दिन में लौटता है और करीब पाँच दिन रहता है — नाम इसी से पड़ा। इसमें सामान्य शुभ कार्य नहीं, पाँच विशेष कर्म वर्जित माने गए हैं: छत डालना, ईंधन एकत्र करना, पलंग बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा और विधि-रहित दाह-संस्कार।

विवाह और अन्य शुभ आरंभ के लिए वर्जित काल

  • 21जन॰
    21 जन॰ → 25 जन॰
    बुधवार
  • 17फ़र॰
    17 फ़र॰ → 21 फ़र॰
    मंगलवार
  • 16मार्च
    16 मार्च → 21 मार्च
    सोमवार
  • 13अप्रैल
    13 अप्रैल → 17 अप्रैल
    सोमवार
  • 10मई
    10 मई → 14 मई
    रविवार
  • 6जून
    6 जून → 11 जून
    शनिवार
  • 4जुल॰
    4 जुल॰ → 8 जुल॰
    शनिवार
  • 31जुल॰
    31 जुल॰ → 4 अग॰
    शुक्रवार
  • 27अग॰
    27 अग॰ → 1 सित॰
    गुरुवार
  • 23सित॰
    23 सित॰ → 28 सित॰
    बुधवार
  • 21अक्टू॰
    21 अक्टू॰ → 25 अक्टू॰
    बुधवार
  • 17नव॰
    17 नव॰ → 22 नव॰
    मंगलवार
  • 14दिस॰
    14 दिस॰ → 19 दिस॰
    सोमवार

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं और उज्जैन के लिए निकाले गए हैं। तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन सर्वत्र एक ही क्षण होता है, इसलिए आपके समय-क्षेत्र से केवल घड़ी में दिखने वाला समय बदलता है — पर जो अवधि वार से बँधी है, वह आपके अपने सूर्योदय से भी चलती है। ऐप दोनों की गणना आपके शहर के लिए करता है।